CHEETAH IN INDIA: NAMIBIA से आए 8 चीतों के लिए रमेश सिकरवार जो पहले डकैत थे लेकिन अब चीतों के रक्षक है..

नामीबिया के 8 चीतों का अब नया ठिकाना है ...नया पता है...। ये नया ठिकाना है कूनो नेशनल पार्क ..। भोपाल से 400 किलोमीटर दूर ये नेशनल पार्क में चीते पलेंगे ...बढ़ेंगे ...फर्राटे भरेंगे .. सवाल है कि आखिर कूनो नेशनल पार्क ही क्यों? चीते का भारत में बरेसा कूनो नेशनल पार्क को क्यों बनाया गया..। तो जान लीजिए ...ये ऐसा इलाका है...जो चीते के माफिक है ...बिल्कुल वैसा ही ..जैसा नामीबिया के जंगलों का वातावरण है .. 10 जगहों की सर्वे के बाद कूनो को चुना गया...यहां का माहौल अफ्रीका के जंगलों की तरह है..। चीतों के लिए यहां पर्याप्त खुराक है..। ऊंचे घास के बड़े मैदान हैं..। कूनो नदी और आस-पास की पहाड़ियां चीतों के पलने-बढ़ने के लिए माकूल है ..। चीतों के शिकार करने ...दौड़ने फर्राटे भरने के लिए काफी जगह है..। इन जंगलों में इंसानों का दखल न के बराबर है..चीतों को लाने से पहले कूनो के जंगलों में दूसरे जानवर लाकर बसाया जा चुका है...200 सांभर, चीतल और दूसरे जानवर खासतौर पर लाकर बसाए गए ..। इनकी जनसंख्या बढ़ने लगी है...। कूनो में चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सुअर, चिंकारा, चौसिंघा, ब्लैक बक, ग्रे लंगूर, लाल मुंह वाले बंदर, शाही, भालू, सियार, लकड़बग्घे, ग्रे भेड़िये, गोल्डेन सियार, बिल्लियां, मंगूज जैसे कई जानवर हैं... अब सवाल है कि मिशन चीता के लिए अफ्रीकी देश नामीबिया को क्यों चुना गया?...चीतों को लाने के लिए सबसे पहले ईरान पर विचार कि गया था...। ईरान के चीतों का जेनेटिक्स अफ्रीकन चीतों से मिलता-जुलता है....लेकिन ईरान ने भारत के सामने एक शर्त भी रख दी...। ईरान ने चीतों के बदले में भारत से शेर मांग लिए....। इसके बाद भारत ने अपना फैसला बदल लिया...। एक्सपर्ट की कमेटी का कहना था कि अगर किसी जंगली जीव को विदेश से लाया जा रहा है तो ऐसी प्रजाति को देखना होगा जो भारत में सर्वाइब कर सके.,, इसके अलावा चीतों के जेनेटिक को भी देखा गया.... उनके व्यवहार को लेकर भी अध्ययन किया गया....फिर जाकर नामीबिया पर मुहर लगी .. कूनो नेशनल पार्क में चीता मित्र बनाए गए हैं, जो उनकी सुरक्षा भी करेंगे। कुल 90 गांवों के 457 लोगों को चीता मित्र बनाया गया है ..। इनमे सबसे बड़ा नाम है रमेश सिकरवार का है, जो पहले डकैत थे लेकिन अब चीतों के रक्षक है...। मूंछों पर ताव, हाथों में बंदूक और सीने पर गोलियों वाला बेल्ट पहने रमेश सिकरवार घर के आंगन में बैठे थे...आजतक से बात करते हुए रमेश सिकरवार ने कहा कि भले ही जान दे दूंगा लेकिन चीतों को कुछ नहीं होने दूंगाकूनो नेशनल पार्क भारत में नए चीतों का पहला घर है ...उम्मीद है कि भारत में चीतों के और भी घर होंगे ...और चीतों की भारी भरकम संख्या होगी ..