Gandhi आंदोलन के 30 साल और अंग्रेज बाहर.. Arvind Mohan की 'गांधी कथा- अँग्रेजों को नमक ने मारा' |

महात्मा गांधी के जीवन पर यूं तो बहुत सारी पुस्तकें लिखी गईं, कई शोध हुए मगर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन की गांधी कथा श्रृंखला की पुस्तकें अपने आप में अनूठी साबित होती हैं. ये अनूठी इसलिए हैं क्योंकि इन पुस्तकों में गांधी से जुड़े तथ्यों को किस्सागोई की शक्ल में पिरोया गया है जो कि पाठकों को पुस्तक से बांधे रखता है. अरविंद की गांधी पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं एवं गांधी पर उनका शोध कार्य भी बहुत विस्तृत है. चूंकि गांधी जी का शहीद दिवस नज़दीक है और इसलिए बुक कैफे के 'एक दिन एक किताब' कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय गांधी जी पर आधारित पुस्तकों की चर्चा कर रहे हैं. इसी कड़ी में आज बारी है अरविंद मोहन की ही गांधी कथा श्रृंखला की तीसरी पुस्तक 'अंग्रेज़ों को नमक ने मारा' की. यह पुस्तक गांधी के आंदोलन की शक्ति, उनके सोच, उनके विचार एवं उनके प्रभाव पर विस्तार से बात करती है. और तो और यह पुस्तक ये भी बतलाती है कि कैसे गांधी जी ने अंग्रेज़ों की कमज़ोरी और भारतीयों की ताकत को पहचाना और विशाल आंदोलनों को खड़ा किया. अगर इस पुस्तक के अध्यायों की बात करें तो इसमें अंग्रेज़ो को नमक ने मारा, चंपारण प्रयोग को क्यों याद करें, जब ईश्वर अल्लाह की प्रेरणा काम आई, बहुत पिटे थे नेता लोग भी, कंजूस भी थे बापू, गांधी और उपवास, बहुत निडर थे बापू आदि शामिल हैं. आज वरिष्ठ पत्रकार 'एक दिन एक किताब' कार्यक्रम में अरविंद मोहन की 'गांधी कथा- अंग्रेज़ों को नमक ने मारा' पर चर्चा कर रहे हैं. सेतु प्रकाशन से प्रकाशित इस पुस्तक में कुल 172 पृष्ठ हैं और इस पुस्तक का मूल्य 225 रुपए है.