Mahatma Gandhi का एक आह्वान | Arvind Mohan की Book 'गांधी कथा- गोरख से हारे मछेन्दर' | EP 495 |

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे

पीड़ परायी जाणे रे... गांधी कथा का यह दूसरा भाग है, हमारे राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी एक ऐसी शख्सियत थे जिन्हें वाकई मात्र एक किताब में समेटना बेहद ही मुश्किल कार्य है. और इसलिए गांधी जी के शहीद दिवस तक आपको बुक कैफे के 'एक दिन एक किताब' कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय गांधी जी के कई किस्सों एवं कहानियों पर आधारित पुस्तकों से रूबरू कराते रहेंगे. सेतु प्रकाशन से आई 'गांधी कथा' पुस्तकों की श्रृंखला में आज 'गोरख से हारे मछेन्दर' की चर्चा की गई है. जिसके लेखक हैं अरविन्द मोहन जो कि जाने-माने पत्रकार, लेखक एवं संपादक हैं. और गांधी जी के जीवन पर काफ़ी शोध कार्य कर चुके हैं. 'गांधी कथा: गोरख से हारे मछेन्दर' को लेकर अरविंद मोहन कहते हैं की यह भाग तैयार करने में उन्हें सचमुच बहुत मश्किल हुई. क्योंकि गांधी जी के जीवन के हज़ारों नायकों में से चुनिंदा नायकों का चुनाव करना मुश्किल था. इस पुस्तक में ऐसे लोगों का परिचय है जिन्होंने गांधी के एक आह्वान पर अपना पूरा जीवन, अपना ज्ञान, अपनी ऊर्जा समर्पित कर दी. और शायद ही कभी किसी ने गांधी से इसकी शिकायत की होगी कि गांधी ने उनका जीवन, उनका करियर बर्बाद कर दिया. न जाने क्या-क्या काम छोड़कर लोग गांधी के साथ जुड़ते गए और उन्होंने जो काम सौंपा उसे जीवन भर पूरे उत्साह से करते रहे. पढ़ाई और खेतीबाड़ी छोड़कर आने वालों की संख्या सबसे ज्यादा होगी. लेकिन हार्वर्ड और कैम्ब्रिज या बड़ी कम्पनियों की नौकरी छोड़कर आने वालों की भी कमी नहीं थी. गांधी को समझने और उनसे जुड़े लोगों को जानने में अरविन्द मोहन की 'गांधी कथा: गोरख से हारे मछेन्दर' पुस्तक महत्वपूर्ण है. आज बुक कैफे के 'एक दिन एक किताब' कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय ने इसी पुस्तक की चर्चा की है. सेतु प्रकाशन से प्रकाशित इस पुस्तक में 182 पृष्ठ हैं और इस पुस्तक का मूल्य 225 रुपए है.