Book Cafe 419: कालजयी गीतों के जादूगर Rajendra Krishan | वो भूली दास्तां | Geetashree | Sahitya Tak

कला समाज को जोड़ने का काम करती है. और कला के ही प्रकार हैं गीत रचना, फ़िल्में बनाना, अभिनय करना आदि. महान दार्शनिक अरस्तु ने भी कला पक्ष को लेकर अनुकरण सिद्धांत की विवेचना की. यह जगजाहिर है कि कला दुनिया में बदलाव लाने की ताकत रखती है. पर कई बार समय कलाकारों के साथ न्याय नहीं करता.

'कहीं से मौत को लाओ कि ग़म की रात कटे

मेरा ही शोक मनाओ कि ग़म की रात कटे'

'करे न पीछा मेरा ज़िंदगी को समझा दो

ये राह उसको भुलाओ कि ग़म की रात कटे..'

ज़ाहिर है कि ऐसे शायरी कहने वाले शख्स का रुतबा आला होगा. अस्सी के दशक में अपने हुनर से भारतीय सिनेमा को उरूज पर ले जाने वाले राजेन्द्र क्रिशन के साथ भी ऐसा ही हुआ. वैसे तो राजेन्द्र क्रिशन भारतीय सिनेमा के जानेमाने गीतकार, पटकथा लेखक और फिल्मकार रहे हैं, पर उनकी चमक समय के अंधड़ में कहीं छुप सी गई. अब जानीमानी लेखिका व संपादक गीताश्री ने कालजयी गीतों के जादूगर और एक शानदार शख़्स 'राजेन्द्र क्रिशन' के जीवन पर एक किताब 'वो भूली दास्तां' नाम से संपादित की है. लेखिका और संपादक गीताश्री मानती हैं कि क्रिशन के प्रचलित गीत 'मेरे सामने वाली खिड़की में', 'पल पल दिल के पास', 'चल उड़ जा रे पंछी' समय के परे है और शायद इसीलिए बड़ी-बड़ी फ़िल्मों में अपनी कला की छटा बिखेरने वाले राजेन्द्र पर कई लेख भी लिखे गए, लेकिन उनको केन्द्र में रख कर लिखी यह किताब अपनी तरह की पहली है और इसीलिए अनोखी है. राजेन्द्र क्रिशन का संजीदा और विनम्र व्यवहार उनकी एक और खासियत थी, जिसे गीताश्री ने बड़ी ही शिद्दत और अथक प्रयासों से इस किताब में पिरोया है. गीताश्री कथाकार एवं पत्रकार हैं. उन्होंने अब तक पांच कहानी संग्रह और तीन उपन्यास लिखे हैं. रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित गीताश्री फ़िलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता और साहित्य लेखन कर रही हैं. आज बुक कैफे के 'एक दिन एक किताब' कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय ने 'राजेन्द्र क्रिशन' पर गीताश्री द्वारा संपादित किताब 'वो भूली दास्तां' की चर्चा की है. इस किताब में कुल 5 खंड हैं जिनमें राजेन्द्र क्रिशन के जीवन पर आधारित आलेखों से लेकर उनके नग़्मों तक की चर्चा है. प्रलेक प्रकाशन से प्रकाशित इस पुस्तक में कुल 194 पृष्ठ हैं, जिसका मूल्य 249 रुपए है. अगर आप एक महान शाइर, गीतकार और लेखक के जीवन गाथा के समझना, जानना और उनके बहाने हिंदी फिल्म जगत के सुरीले नग़्मों के बनने के पीछे की कहानी को जानना चाहते हैं तो इस पुस्तक को खरीदकर पढ़ सकते हैं.