Book Cafe 422: स्त्री हैरान है, उसके हाथ में अपने... 'बताओ मनु' Sushma Singh का संग्रह | Sahitya Tak

स्त्री हैरान है

उसके हाथ में अपने वर्ग का इतिहास है

पन्ने-दर-पन्ने

पढ़ रही है वो

आश्चर्य उसके चेहरे पर बढ़ता ही

जा रहा है.

अचानक वो पूछ उठती है

बताओ मनु,

किन तथ्यों पर तुमने

मेरा इतिहास लिखा.... ये काव्य पंक्तियां हैं सुषमा सिंह की. स्त्रियों के ज़ुल्फ़ पर कविताएं लिखी गई हैं, उनके हुस्न पर भी कविताएं रची और गढ़ी गई हैं परन्तु उनके ज़िंदगी की हर एक बारीकियों पर, उनके जीवन पथ की कठिनाइयों पर लिखा तो गया है, मगर थोड़ा कम. यह कहना कि आज के दौर में स्त्रियों को सभी सुख-सुविधा मिली हुई है, आसान है मगर इसे साबित कर पाना बहुत मुश्किल. स्त्री विमर्श पर सुषमा सिंह की कविता-संकलन 'बताओ मनु' इन्हीं द्वंदों पर खुल कर बात करती है. इस संग्रह पर चर्चित कवयित्री अनामिका का कहना है कि स्त्री-कविता अभिधा-लक्षणा-व्यंजना की जिन अलग-अलग बुनावटों में उपस्थित है, उसके विश्लेषण से इस समाज की अलग-अलग सरणियों में अलग-अलग ढंग से मुकुलित स्त्री-चेतना के कई रंग उजागर हो सकते हैं और यह भी स्पष्ट हो सकता है कि स्त्रीवाद एकाश्म (मोनोलिथ) नहीं है. अलग-अलग वर्गों-वर्णों-नस्लों से जुड़ी स्त्रियों की कुछ समस्याएं तो विशिष्ट हैं ही, पर कुछ विरासतें उसकी साझा भी हैं– देह सबके यहां शोषण की आधार-पीठिका है और सबकी भाषा के आंचल में जातीय स्मृतियों की वही मूंगफलियां बंधी हैं, जिन्हें फांकते हुए स्त्रियों ने अलग-अलग कोनों से मुक्ति का महास्वप्न देखा, नाली का कीचड़ साफ़ करते हुए चौके की पिढ़िया को पढ़ाई की मेज बनाने का उपक्रम साधते हुए. सुषमा प्रतियोगिता परीक्षा के कई चरण लांघकर कहीं पहुंची उन स्त्री कवियों में हैं, जिनमें बहनापे की आग बुझी नहीं है. संविधान द्वारा दिखाए गए सपने स्त्री-जीवन की विडंबनाएं अभी तक नहीं काट पाए, क़ानून अभी भी काग़ज़ का फूल है–इसका प्रतिकार एक अलग तरह की अग्निधर्मा तेजस्विता के साथ इन कविताओं में उजागर है. इस संकलन में शामिल कविताओं की प्रासंगिकता देखते हुए आज 'बुक कैफे' के 'एक दिन, एक किताब' कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय ने सुषमा सिंह के कविता-संकलन ''बताओ मनु' की चर्चा की है. इस पुस्तक में कुल 57 कविताएं हैं और सभी कविताएं स्त्रियों पर केन्द्रित हैं. हिन्द युग्म से प्रकाशित इस काव्य-संकलन में 128 पृष्ठ हैं. इसका मूल्य 199 रुपए है. अगर आप कविताएं, खास कर स्त्री विमर्श से जुड़ी कविताएं पसंद करते हैं तो आप इसे खरीद कर पढ़ सकते हैं.