Book Cafe को Advik Publication से जो 8 पुस्तकें मिलीं | Kitabein Mili | Sahitya Tak

किताबें आपके ज्ञान को तो बढ़ाती ही हैं, आपका मनोरंजन भी करती हैं. ये भाषा और विचारों के स्तर पर आपको समृद्ध भी करती हैं. इसीलिए 'साहित्य तक' के बुक कैफे में 'एक दिन एक किताब' के तहत हर दिन किसी न किसी किताब पर बात होती है.आप सबके लिए हमारे पास हर सप्ताह ढेरों किताबें आ रही हैं, इसके चलते कई बार किसी पुस्तक की चर्चा में विलंब भी हो जाता है. इसीलिए हम साहित्य तक पर 'किताबें मिली' के तहत उन किताबों के बारे में आपको सूचना दे रहे हैं, जो हमें प्राप्त हुई हैं. यह 'बुक कैफे' की ही एक श्रृंखला है. वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय आपको उन पुस्तकों की जानकारी दे रहे हैं. इस सप्ताह हमें अद्विक पब्लिकेशन से प्रकाशित जो पुस्तकें मिलीं हैं, उनमें डाॅ रमाकांत शर्मा की पुस्तक 'सफ़ेद तितली', राजेश आनंद बक्शी की 'नग़्मे क़िस्से बातें यादें' इसका हिंदी अनुवाद यूनुस खान ने किया है, सूरज प्रकाश के अनुवाद से आई 'एन फ़्रैंक की डायरी', तेजेन्द्र शर्मा के संपादन में आई 'अपनी बात- पुरवाई पत्रिका के लिए लिखे गए संपादकीय खण्ड-1', डाॅ सुनीता की 'शंख पर असंख्य क्रंदन', आबिद सुरती की 'शेर के साथ सेल्फ़ी', आबिद सुरती की ही एक और पुस्तक 'तीसरी आंख', और जवाहर चौधरी की 'गांधी जी की लाठी में कोंपलें' नामक पुस्तकें शामिल हैं. पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए साहित्य तक की इस पहल के साथ जुड़े रहें. हर सप्ताह ठीक रविवार इसी समय यहां आप जान सकते हैं कि किस प्रकाशक विशेष की कौन सी पुस्तकें, हमें यानी साहित्य तक को मिलीं.