किताबें, जो आपको पढ़नी चाहिए | Book Cafe को Pralek Prakashan से जो 10 पुस्तकें मिलीं | Sahitya Tak

किताबें आपके ज्ञान को तो बढ़ाती ही हैं, आपका मनोरंजन भी करती हैं. ये भाषा और विचारों के स्तर पर आपको समृद्ध भी करती हैं. इसीलिए 'साहित्य तक' के बुक कैफे में 'एक दिन एक किताब' के तहत हर दिन किसी न किसी किताब पर बात होती है.आप सबके लिए हमारे पास हर सप्ताह ढेरों किताबें आ रही हैं, इसके चलते कई बार किसी पुस्तक की चर्चा में विलंब भी हो जाता है. इसीलिए हम साहित्य तक पर 'किताबें मिली' के तहत उन किताबों के बारे में आपको सूचना दे रहे हैं, जो हमें प्राप्त हुई हैं. यह 'बुक कैफे' की ही एक श्रृंखला है. वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय आपको उन पुस्तकों की जानकारी दे रहे हैं. इस सप्ताह हमें प्रलेक प्रकाशन से प्रकाशित जो पुस्तकें मिलीं, उनमें दिनेश द्विवेदी और राजेश चंदा की 'अमृता प्रीतम जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में 'दो परिंदे और नीलकुरिंजी का फूल'', गीताश्री द्वारा संपादित और राजेन्द्र किशन द्वारा लिखित 'वो भूली दास्ताँ', डॉ प्रियंका की 'निर्गुण संत संगीत', अग्निशेखर की 'मैं ललद्यद', चन्द्रकला त्रिपाठी की 'चन्ना तुम उगिहो', राजगोपाल सिंह वर्मा की 'तारे में बसी जान', हुस्न तबस्सुम निहाँ की 'कामनाओं के नशेमन', ज्योति कुमारी की 'पथ ही मुड़ गया', कुमार वरुण द्वारा सम्पादित 'सत्यापन (स्त्री बोध की कहानियां)', गिरीश्वर मिश्र की 'सांस्कृतिक चेतना के उन्नायक', जयंती रंगनाथन की 'रेड लाइट एरिया : यहाँ आना मना/जरुरी है' शामिल है. हर सप्ताह ठीक इसी समय यहां आप जान सकते हैं कि किस प्रकाशक विशेष की कौन सी पुस्तकें हमें यानी साहित्य तक को मिलीं.