हल्दीघाटी के रचयिता Pt. Shyam Narayan Pandey जयंती | पं श्यामनारायण पांडेय ग्रंथावली- 4 खंड | EP-637 | Tak Live Video

हल्दीघाटी के रचयिता Pt. Shyam Narayan Pandey जयंती | पं श्यामनारायण पांडेय ग्रंथावली- 4 खंड | EP-637

रण बीच चौकड़ी भर-भर कर

चेतक बन गया निराला था

राणा प्रताप के घोड़े से

पड़ गया हवा का पाला था

जो तनिक हवा से बाग हिली

लेकर सवार उड़ जाता था

राणा की पुतली फिरी नहीं

तब तक चेतक मुड़ जाता था... बचपन में हम सबने वीर रस की यह कविता सुनी या पढ़ी होगी. इसके रचयिता वीर रस के महान कवि पंडित पं. श्याम नारायण पांडेय थे, शीर्षक था 'चेतक की वीरता'. लेकिन सच तो यह है कि यह उनके द्वारा रचित खंड काव्य 'हल्दीघाटी' का एक अंश है. यह संयोग है कि आज हिंदी के इस महान कवि की जयंती है. श्याम नारायण पांडेय का जन्म सन् 1907 श्रावण कृष्ण 6 को उत्तर प्रदेश के मऊ के डुमरांव में हुआ था. पं. श्याम नारायण पांडेय आधुनिक हिंदी साहित्य में एक श्रेष्ठ वीर काव्य प्रणेता के रूप में जाने जाते हैं. महाकवि भूषण के बाद यदि किसी की कविता में वीर रस का ऐसा उत्साहक सृजन मिलता है, तो वह पं. श्याम नारायण पांडेय ही हैं. इसलिए उन्हें 'आधुनिक युग का भूषण' कहा जाता है. 'हल्दी घाटी' व 1 'जौहर' जैसी दर्जनभर पुस्तकों के प्रणेता के रूप में उन्होंने हिंदी साहित्य के लेखन व वाचिक परंपरा में प्रभूत यश अर्जित किया. सनातन संस्कृति से आर्य होते हिंदू धर्म तक के पुरातन मध्ययुगीन तथा आधुनिक काल तक भारतीय शौर्य पर उनका निर्भीक व सेवाक लेखन हिंदी साहित्य के लिए धरोहर जैसा है. 'त्रेता के दो वीर', 'हल्दीघाटी', 'जौहर', 'आरती', 'जय हनुमान', 'गोरावध', 'शिवाजी', 'बालिवध', 'वशिष्ठ', 'परशुराम' जैसी रचनाओं के सृजन के अलावा उन्होंने कालिदास के कुमार संभव 'सातवां सर्ग' तक को अनूदित कर उन्होंने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने अपनी भूमिका निभाई. पंडित श्याम नारायण पांडेय ने अपनी कविताओं से न केवल भारतीय काव्य मंच व भारतीय साहित्य को समृद्ध किया बल्कि एक ऐसा स्वर दिया जिससे बच्चे-बच्चे के मन में राष्ट्रीय नायकों, अपने शौर्य व वीरता के प्रति एक आस्था जागी.

इसीलिए आज पंडित श्याम नारायण पांडेय की जयंती के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पांडेय ने साहित्य तक के 'बुक कैफे' के 'एक दिन एक किताब' कार्यक्रम में 'पं. श्याम नारायण पांडेय ग्रंथावली' की चर्चा की है. यह ग्रंथावली प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित है. चार खंडों में प्रकाशित इस ग्रंथावली के पहले खंड में 'हल्दीघाटी- जय हनुमान- आरती', दूसरे खंड में 'जौहर -तुमुल- माधव', तीसरे खंड में 'परशुराम- रूपांतर' और चौथे खंड में 'शिवाजी- गोरा वध' जैसी कालजयी रचनाएं शामिल है. इस ग्रंथावली के प्रधान सम्पादक पुरुषार्थ सिंह हैं और उपसंपादक के रूप में डॉ अंजना सिंह सेंगर व डॉ सीमा सिंह ने काम किया है. पंडित श्याम नारायण पांडेय की लुप्तप्राय दस कृतियों को एकसूत्रित कर ओज के आधुनिक भूषण के अंतरतम को चार खंडों में संकलित करने की कोशिश इन ग्रंथावलियों के ज़रिए की गई है. यह ग्रंथ आदि से आधुनिक काल तक, पराधीनता के बंधन से लेकर जीवन के उन्नयन तक, मुक्ति की चाह में लड़ते मन से लेकर सहज मन के भावार्पण तक को एकरूपता देने की इसके संपादकों की कोशिश सराहनीय है. पंडित श्याम नारायण पांडेय के विकट जीवन-संघर्षों की गाथा को रचने व हिंदी साहित्य के लुप्तप्राय पृष्ठों को संकलित कर ग्रंथावली के रूप में उपलब्ध कराने के लिए इसके प्रकाशक और सम्पादक को साहित्य तक की बधाई. प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित 'पं श्याम नारायण पांडेय ग्रंथावली' की चार पुस्तकों के हार्डबाउंड संस्करण के सेट का मूल्य है 3000 रुपए.