Jyoti Azad Poetry | बाद में मेरी तस्वीर देखते रहना | Mushaira | Love Poetry | Sahitya Tak

मैं सामने हूं गुफ़्तगू करो मुझसे

कि बाद में मेरी तस्वीर देखते रहना... ज्योति आज़ाद की शानदार कविता आप भी सुनें साहित्य तक पर.