कुछ दुखों का अंत केवल एकांत होता है | Aashiq | Ye Ishq Hai में Sanjeev Paliwal | Sahitya Tak

प्यारी मीरा,

आज पूरे एक साल के बाद मैं तुमको खत लिख रहा हूं. इस दरम्यान हमारे बीच कोई ख़ास राब्ता भी नहीं रहा. सो खत लिखने की सूरत भी नहीं बनी. आज की तारीख़ मेरी और शायद तुम्हारी ज़िंदगी में भी ख़ास जगह रखती है इसलिए मैं यह खत लिख रहा हूं. न जाने क्यों एक घबराहट सी हो रही है. एक डर है भीतर कि कहीं ये खत मुझे फिर से उस भावुकता में न डुबो दे, जिससे मैं बड़ी मुश्किल से बाहर निकला हूं. जिससे निकलने के लिए मैंने अपने जीवन में बडी कीमत चुकाई है. मुझे याद नहीं पड़ता कि आख़िरी बार तुम्हे खत लिखने के बारे में कब मैंने इतना सोचा था. मगर अब पहले जैसी परिस्थितियां भी तो नहीं है. पहले जैसा कुछ भी तो नहीं है। इस खत से कुछ भी बदलेगा, मैं इस मुगालते में नहीं हूं. तुम अपनी ज़िंदगी में बहुत आगे निकल चुकी हो. मैं भी अपने जीवन में गहरे उतर रहा हूं. इसलिए इस खत को लिखना हमारे संबंधों के व्याकरण को नहीं बदलेगा. कम से कम अभी तो मुझे ऐसा ही लगता है. मीरा, आज से ठीक साल भर पहले हम दोनों पहली बार मिले थे. 2021 का साल था, जुलाई महीने की 26 तारीख़ थी, सावन माह का पहला सोमवार था. हम दोनों पहली बार एक दूसरे से मिलने वाले थे. अभी यह बात जितनी सुखद और रोमांचित करने वाली लगती है, तब ऐसा नहीं था. हमारे रिश्ते में एक धूल जम गई थी. हमारे बीच का खूबसूरत रिश्ता दुनियादारी की भेंट चढ़ रहा था. तुम मुझसे मिलना चाहती थी. इसी सिलसिले में तुम ऋषिकेश आई थी.

तुम्हारे ऋषिकेश आने से पहले, हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित थे. हम दोनों एक दूसरे का सम्मान करते थे. यहीं से हमारे रिश्ते की शुरूआत हुई थी. दो तीन महीने में ही हम दोनो एक दूसरे से इतना जुड़ गए कि महसूस होने लगा हम दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. हम दोनों को यह महसूस होने लगा कि प्रेम ही दुनिया है, प्रेम ही सब कुछ है. प्रेम में रहते हुए प्रेमियों को अक्सर यह भ्रम हो जाता है. लेकिन भ्रम तो होता ही है टूटने के लिए. सो हमारा भ्रम भी एक रोज़ टूट गया. तुम्हारे सपने थे, तुम्हारी महत्वकांक्षाएं थीं, जिनके लिए तुम जी रही थीं. मैं पारिवारिक संघर्ष में उलझा हुआ था. जीवन की गति और उन्नति ठहरी हुई थी. प्रेम आख़िर कब तक आदर्शवाद को गले लगाकर रख पाता. एक दिन तुम्हें यह महसूस हुआ कि सिर्फ़ प्रेम और जुनून से जीवन संभव नहीं है. रोज़गार, पैसा और सबसे महत्वपूर्ण तत्व स्थायित्व जीवन में ज़रूरी है. मेरे जीवन में स्थायित्व की छाया दूर दूर तक नहीं थी. इन्हीं विरोधाभास के कारण हमारे रिश्ते में घुटन महसूस होने लगी. यही कारण रहा कि तुम एक महीना ऋषिकेश रही और मेरा तुम्हारा मिलना स्थगित होता रहा.


Love Season 2 ये इश्क है, 'इश्क वाला लव' का दुसरे सीज़न की यह चौथी कहानी है यह कहानी आशिक की है, जिसको पढ़ने कि स्वीकृति फेसबुक पेज द्वारा ही ली गयी है. पूरी कहानी सुनें जाने-माने पत्रकार और अपराध कथा लेखक संजीव पालीवाल से, जिसे साहित्य तक पर अपने लोकप्रिय कार्यक्रम 'इश्क वाला Love' के दुसरे सीज़न के लिए जो की 'ये इश्क है', है. उन्होंने रिकॉर्ड किया है.