कभी तो हुस्न का सदका निकालो | Dr. Anjum Barabankvi | Sher O Shayri | Sahitya Tak

ज़रा महफूज़ रस्तों से गुज़रना

तुम्हारी शहर में शौहरत बहुत है

ग़ज़ल खुद कह के पढ़ना चाहते हो

मियां इस काम में महनत बहुत है...डॉ. अंजुम बाराबंक्विक की ग़ज़ल आप भी सुनिए सिर्फ साहित्य तक पर.