पारिवारिक पतंग की हैं डोर पिताजी | Amar Yaduvanshi | Emotional Poetry | Sahitya Tak

मन की थोड़े हैं कठोर पिताजी

पर पारिवारिक पतंग की हैं डोर पिताजी

जब जब परेशानियों से सामना हुआ

तब तब हमें दिखें हैं चारों ओर पिताजी...अमर युद्धवंशी की यह भावुक कविता आप भी सुनिए सिर्फ साहित्य तक पर