Mainpuri Byelections : सपा जीत के तो कर रही दावे लेकिन यहां के जातीय समीकरण कहीं खेल न बिगाड़ दें!

कुछ साल पहले तक यूपी के गांवों में नारा लगता था- जिसका जलबा कामय है, उसका नाम मुलायम है. मुलायम सिंह यादव अब इस दुनिया में नहीं हैं. लेकिन उनकी नाम की राजनीति यूपी इस वक्त सबसे ज्यादा तेज है. मुयालम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी की सीट के लिए बीजेपी और सपा दोनों ही मुलायम के नाम पर वोट मांग रहे हैं. हालांत ये है कि यादव परिवार, जो मुलायम के रहते टूट गया था, वो सभी मैनपुरी की सीट बचाने के लिए एक साथ आ गया. एक ही मंच रामगोपाल यादव, शिवपाल यादव और अखिलेश यादव साथ नजर आते हैं. जिसे जहां मौका मिल रहा है कैमरे का सामने झट से एक दूसरे को पैर पकड़ ले रहा है. वहीं, उपचुनाव में हार का रिकॉर्ड के बावजूद अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी डिंपल यादव को मैदान में उतार दिया है. खूब जोरो-शोरों से प्रचार हो रहा है. दूसरी शिवपाल और मुलायम का शिष्य बताकर बीजेपी ने रघुराज शाक्य को मैदान में उतार दिया. जितनी चर्चा में देश में गुजरात और हिमचाल के चुनावों की है, ठीक उतनी ही चर्चा मुलायम सिंह यादव के आखिर गढ़ मैनपुरी की भी. तो यह समझना बहुत जरूरी है कि आखिर गुरु माहौल क्या है?