सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लोगों को मिल रहे आरक्षण पर अपनी मुहर लगा दी है.

चीफ जस्टिय यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच में से तीन जजों ने आरक्षण के पक्ष में अपना फैसला दिया है,जबकि दो जजों ने पर अपनी असहमति जताई है.

 जानते है किन-किन जजों ने क्या फैसला सुनाया?

 जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने EWS आरक्षण के पक्ष में कहा कि आर्थिक आरक्षण संविधान के मौलिक ढांचे के खिलाफ नहीं है,103वां संशोधन वैध है.

जस्टिस बेला त्रिवेदी ने भी इस फैसले पर सहमति जताई है और कहा कि एससी/एसटी/ओबीसी को पहले से आरक्षण मिला हुआ है और उसमें सामान्य वर्ग के साथ शामिल नहीं किया जा सकता है

   जस्टिस पारदीवाला ने सहमति जताते हुए कहा आरक्षण का अंत नहीं है यह साधन है इसे निहित स्वार्थ नहीं बनने देना चाहिए.

 जस्टिस रविन्द्र भट ने असहमति जताते हुए कहा है कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा SC/ST/OBC का है,उनमें बहुत से लोग गरीब हैं इसलिए 103वां संशोधन गलत है.

 चीफ जस्टिस यूयू ललित ने भी आर्थिक आधार पर आरक्षण का विरोध किया और उन्होंने कहा मैं जस्टिस रविंद्र भट के फैसले से सहमत हूं और 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा पार करना मूल ढांचे के खिलाफ है.

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