मुलायम सिंह यादव के गांव 'सैफई' से जुड़ी खास बातें.

 उनका जन्म 22 नवंबर 1939 को सैफई गांव में हुआ था. इसी गांव से निकलकर वे राजनीति में चमके और तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने के अलावा देश के रक्षा मंत्री भी रहे.

इस गांव में समाजवादी पार्टी के पूर्व मुखिया मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव ने हर वो जरूरी चीजें मुहैया कराने की कोशिश की है, जो बड़े-बड़े महानगरों में होती है.

सैफई गांव मैनपुरी और इटावा से चार लेन के
 स्टेट हाईवे से जुड़ा हुआ है. गांव के बगल से
 ही आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे भी गुजरता है.

यहां पर सैफई रेलवे स्टेशन भी है, जो इटावा-मैनपुरी रेलवे ट्रैक पर स्थित है. इसके अलावा सैफई में बस स्टैंड और बस डिपो भी है. यहां से लगभग सभी बड़ी जगहों पर बसें जाती हैं. 

यहां एक मेडिकल कॉलेज है, जिसमें 200 से ज्यादा डॉक्टर और 300 से ज्यादा नर्सिंग
स्टाफ है. इसके अलावा मेजर ध्यानचंद
स्पोर्ट्स कॉलेज भी है.

यहां हर साल 'सैफई महोत्सव' होता है. इस महोत्सव में बड़े-बड़े फिल्मी कलाकार भी शामिल होते हैं. हालांकि, 2016 से सैफई महोत्सव का आयोजन नहीं हुआ है. 

सैफई गांव कभी खेती-बाड़ी पर निर्भर हुआ करता था. लेकिन आज इस गांव में वो सारी सुविधाएं (एजुकेशन, हेल्थ और स्पोर्ट्स) हैं. महज 7 हजार की आबादी वाला ये गांव अब  बड़ा हब बन चुका है. 

मुलायम सिंह यादव के निधन बाद सैफई गांव में मातम पसरा है. वो लंबे वक्त से बीमार थे.

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